Swatantrata Quotes In Hindi
प्रत्येक जीव स्वतंत्र है,
कोई किसी और पर निर्भर नहीं करता !! जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो,
तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है !! जो लोग दूसरों को
आज़ादी देने से इनकार करते है,
वह खुद भी इसके योग्य नहीं है !! स्वतंत्रता कुछ नहीं,
बस बेहतर होने का
अवसर मात्र है !! स्वतंत्रता पर उन लोगों का
निसंदेह आधिपत्य होता है,
जिनके अन्दर उसका
बचाव करने का साहस होता है !! स्वतन्त्रता एक
व्यक्तिगत और एकाकी युद्ध है,
और हर व्यक्ति आज के डर से
मुकाबला करता है
ताकि कल के डर से
बचा जा सके !! स्वतंत्रता किसी भी मनुष्य की
वो स्वाभाविक शक्ति है,
जहाँ उसे मजबूर करके या
नियम बना कर रोका न जाये जो
उसे वो करने देती है जो वो चाहता है !! अपने पास कुछ न होना ही
वास्तविक स्वतंत्रता है,
मैं तब सबसे अधिक स्वतंत्र था
जब मेरे पास एक भी पैसा नहीं था !! हम कितनी चीजों को
आसानी से छोड़ सकते है,
उसकी गणना से ही हमारी
स्वतंत्रता मापी जाती है !! जब हम कुछ अलग होने का
अधिकार खोते है,
तब हम स्वतंत्र होने का
विशेषाधिकार भी खो देते है !! स्वतंत्रता कभी भी आसानी
से नहीं जीती जाती,
लेकिन जब एक बार स्वतंत्रता
स्थापित हो जाती है तब
हमेशा टिकी रहती है,
और अन्याय को हमेशा के
लिए रोक देती है !! जोर-जबरदस्ती आखिरकार मनुष्य को
मात्र पकड़ कर रखती है,
जबकि स्वतंत्रता उसे लुभा कर रखती है !! स्वतंत्रता कभी भी अत्याचारी द्वारा
स्वेच्छापूर्वक नहीं दी जाती,
बल्कि ये उत्पीड़ित व्यक्ति से
अनिवार्य रूप से मांगी जाती है !! अपने गहरे डर पर रौशनी डालें,
उसके बाद डर अपनी ताकत खो देगा,
स्वतन्त्रता का डर सिकुड़ कर
समाप्त हो जायेगा,
और आप स्वतंत्र हो जायेंगे !! अनुपालन स्वतन्त्रता के लिए
जेलर के सामान है,
और उन्नति की शत्रु है !! सिर्फ सोते समय ही वास्तविक
स्वतंत्रता का अनुभव होता है,
क्यूंकि सपनों पर किसीकी
हुकूमत नहीं चल सकती !! हमारे बलिदान और परिश्रम से
जो स्वतंत्रता हमें मिलती है,
उसे हम अपनी सामर्थ्य से
बचा कर रख सकते है !! दुसरे व्यक्ति के मनमाने नियमों से
आजादी ही स्वतंत्रता है !! जिम्मेदारी स्वतंत्रता की किम्मत है !! सभी मनुष्यों में स्वतंत्रता,
बिना सामान्य ज्ञान के
बचा कर नहीं रखी जा सकती !! स्वतंत्रता कभी भी दी नहीं जाती,
हमेशा जीती जाती है !! गलती हो जाने का
अधिकार स्वतंत्रता है,
न की गलत होने का !! स्वतंत्रता की अधिकता,
चाहे वो राज्यों या
व्यक्तियों में निहित हो,
केवल गुलामी की
अधिकता में बदल जाती है !! स्वतंत्र होना अपनी जंजीर को
उतार देना मात्र नहीं है,
बल्कि इस तरह जीवन जीना है की
औरों का सम्मान और स्वतंत्रता बढे !!
कोई किसी और पर निर्भर नहीं करता !! जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो,
तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है !! जो लोग दूसरों को
आज़ादी देने से इनकार करते है,
वह खुद भी इसके योग्य नहीं है !! स्वतंत्रता कुछ नहीं,
बस बेहतर होने का
अवसर मात्र है !! स्वतंत्रता पर उन लोगों का
निसंदेह आधिपत्य होता है,
जिनके अन्दर उसका
बचाव करने का साहस होता है !! स्वतन्त्रता एक
व्यक्तिगत और एकाकी युद्ध है,
और हर व्यक्ति आज के डर से
मुकाबला करता है
ताकि कल के डर से
बचा जा सके !! स्वतंत्रता किसी भी मनुष्य की
वो स्वाभाविक शक्ति है,
जहाँ उसे मजबूर करके या
नियम बना कर रोका न जाये जो
उसे वो करने देती है जो वो चाहता है !! अपने पास कुछ न होना ही
वास्तविक स्वतंत्रता है,
मैं तब सबसे अधिक स्वतंत्र था
जब मेरे पास एक भी पैसा नहीं था !! हम कितनी चीजों को
आसानी से छोड़ सकते है,
उसकी गणना से ही हमारी
स्वतंत्रता मापी जाती है !! जब हम कुछ अलग होने का
अधिकार खोते है,
तब हम स्वतंत्र होने का
विशेषाधिकार भी खो देते है !! स्वतंत्रता कभी भी आसानी
से नहीं जीती जाती,
लेकिन जब एक बार स्वतंत्रता
स्थापित हो जाती है तब
हमेशा टिकी रहती है,
और अन्याय को हमेशा के
लिए रोक देती है !! जोर-जबरदस्ती आखिरकार मनुष्य को
मात्र पकड़ कर रखती है,
जबकि स्वतंत्रता उसे लुभा कर रखती है !! स्वतंत्रता कभी भी अत्याचारी द्वारा
स्वेच्छापूर्वक नहीं दी जाती,
बल्कि ये उत्पीड़ित व्यक्ति से
अनिवार्य रूप से मांगी जाती है !! अपने गहरे डर पर रौशनी डालें,
उसके बाद डर अपनी ताकत खो देगा,
स्वतन्त्रता का डर सिकुड़ कर
समाप्त हो जायेगा,
और आप स्वतंत्र हो जायेंगे !! अनुपालन स्वतन्त्रता के लिए
जेलर के सामान है,
और उन्नति की शत्रु है !! सिर्फ सोते समय ही वास्तविक
स्वतंत्रता का अनुभव होता है,
क्यूंकि सपनों पर किसीकी
हुकूमत नहीं चल सकती !! हमारे बलिदान और परिश्रम से
जो स्वतंत्रता हमें मिलती है,
उसे हम अपनी सामर्थ्य से
बचा कर रख सकते है !! दुसरे व्यक्ति के मनमाने नियमों से
आजादी ही स्वतंत्रता है !! जिम्मेदारी स्वतंत्रता की किम्मत है !! सभी मनुष्यों में स्वतंत्रता,
बिना सामान्य ज्ञान के
बचा कर नहीं रखी जा सकती !! स्वतंत्रता कभी भी दी नहीं जाती,
हमेशा जीती जाती है !! गलती हो जाने का
अधिकार स्वतंत्रता है,
न की गलत होने का !! स्वतंत्रता की अधिकता,
चाहे वो राज्यों या
व्यक्तियों में निहित हो,
केवल गुलामी की
अधिकता में बदल जाती है !! स्वतंत्र होना अपनी जंजीर को
उतार देना मात्र नहीं है,
बल्कि इस तरह जीवन जीना है की
औरों का सम्मान और स्वतंत्रता बढे !!
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